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आप मानें या न मानें, सलीम खान का हृदय परिवर्तन हो चुका है।

जी हाँ, ये किसी और की नहीं ‘स्वच्छ संदेश-हिन्दुस्तान की आवाज़’ वाले सलीम खान की ही बात हो रही है। पिछले दिनों उनको लेकर बहुत कुछ लिखा गया है, उस लिखे में कितनी हकीकत थी और कितना फ़साना, यह आप सबको पता चल चुका है। पर इस सम्पूर्ण प्रकरण ने सलीम खान को बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया है और उन्होंने अपने आप को बदलने का फैसला ले लिया है।

अब आप पूछेंगे कि इस घटना से मेरा क्या सम्बंध? मैं क्यों सलीम खान की वकालत कर रहा हूँ? तो रूकिए जनाब, बताता हूँ, सब बताता हूँ।

लेकिन इस बात को बताने से पहले इसकी भूमिका बताना मैं आपको जरूरी समझता हूँ। क्योंकि इसके बिना न तो आप पूरी बात समझ पाएंगे और न ही इसका मंतव्य।

सलीम खान हमारे शहर लखनऊ के रहने वाले हैं और वे निहायत ईमानदार, मेहनती और कर्तव्यपरायण व्यक्ति हैं। ये बातें मुझे परसों उनसे मिलकर पता चलीं। दिनांक 09 दिसम्बर को टेलीफोन पर सलीम का जब अचानक फोन आया, तो मुझे उनसे मिलने की इच्छा जागृत हो उठी। हालाँकि सलीम खान से मेरी पुस्तक 'हिन्दी में पटकथा लेखन' के विमोचन के दौरान हुई क्षणिक भेंट के बाद मैं मिलना चाहता था, पर व्यस्तता के कारण यह सम्भव नहीं हो रहा था। पर महफूज़ भाई वाले कांड ने इस मुलाकात को अवश्यम्भावी बना दिया।

शाम को पांच तीस के करीब हजरतगंज स्थित हिन्दी संस्थान के गेट पर मुलाकात हुई। उसके बाद हम लोग एक छोटे से होटल पर बैठे और चाय समोसे के आर्डर के बाद एक दूसरे से रूबरू हुए। ज़ाहिर सी बात है कि बातों की शुरूआत स्वच्छ हिंदुस्तान वर्सेस उम्दा सोच ही रही, लेकिन जैसे जैसे यह सिलसिला आगे बढ़ता गया, मेरे सामने सलीम खान का एक अनूठा व्यक्तित्व सामने आता गया। और वह था परिस्थितियों से घिरा हुआ एक अदद पुतला। परिस्थितियाँ कितनी जालिम होती हैं, किस तरह से व्यक्ति को मजबूर कर देती हैं, यदि यह आपको देखना हो, तो भगवती चरण वर्मा का कालजयी उपन्यास ‘चित्रलेखा’ देखा जा सकता है।

उन बातों को सुनकर मैं एकदम हतप्रभ रह गया। किस प्रकार लोग अपने छोटे से लाभ के लिए दूसरों को बलि का बकरा बना देते हैं, इसका जीता जागता उदाहरण सलीम खान हैं।

दो घन्टे चली इस बातचीत के बाद जैसा मैं सोच रहा था, वैसा ही हुआ। हाँ, चाहे आप मानें या न मानें मेरी दलीलों, आग्रहों और सुझावों ने सलीम खान का हृदय परिवर्तन कर दिया था। उन्होंने मुझसे वादा किया कि वे अपनी पुरानी जिंदगी के ढ़र्रे को बदलते हुए अपनी लेखन शैली को बदल देंगे और भविष्य में सिर्फ विज्ञान संचार सम्बंधी विषयों पर ही अपनी कलम चलाएँगे।

सलीम खान के इस आश्वासन के बाद मैंने ‘साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन’ में योगदान के लिए उन्हें आमंत्रित कर लिया है। हमारी ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वे सलीम खान की पुरानी छवि से बाहर निकलने में मदद करेंगे। और साथ ही साथ तमाम ब्लॉगर साथियों से भी आग्रह है कि वे भविष्य में सलीम खान को छेड़ने वाले आलेख नहीं लिखेंगे। क्योंकि ये सबको पता है कि पुराने ज़ख्मों को हरा होने में और सोए हुए शेर को भड़कने में देर नहीं लगती।

43 comments:

श्रीश पाठक 'प्रखर' ने कहा…

shubhkaamnayen....!!!

जी.के. अवधिया ने कहा…

सलीम खान के हृदय परिवर्तन होने से अच्छी बात और क्या हो सकती है?

यहाँ इस ब्लोगजगत में किसी की भी किसी की व्यक्तिगत दुश्मनी बिल्कुल नहीं है। अतः सलीम खान से भी किसी की व्यक्तिगत दुश्मनी हो ही नहीं सकती। यदि सभी एक दूसरे का सम्मान करते हुए अपने अपने रास्ते चलें तो किसी प्रकार का कोई वैमनस्य हो ही नहीं सकता।

हमारी तो ईश्वर से यही प्रार्थना है कि ब्लोगजगत में सद्भाव बना रहे।

अवधिया चाचा ने कहा…

बेटा पहले कमेटस कर रहा हूं फिर पढूंगा तब तक तुम भी पढ लो

ब्‍लागवाणी पर पत्रकारों को दी गाली का पब्लिश होना उचित या अनुचित?
http://dhankedeshmen.blogspot.com/2009/12/blog-post.html

Mohammed Umar Kairanvi ने कहा…

हमारी भी शुभकामनाऐं, अगर यह काम होना था तो यह काम आप ही कर सकते थे, आपने ही क्‍या आखिर ह्रदय परिर्तन करने में साइंस ही कामयाब होसकती है, मुझे चंद मिन्‍ट पहले उनसे यह खबर मिली कि वह एक बडा ब्‍लाग ज्‍वाइन कर रहे हैं, आगे शायद कल पता चले...

मेरी और हमारी अन्‍जुमन ब्‍लाग की ओर से पेशगी बधाई

achhi post ko chatka No.5

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

दुनिया में इंसान द्वारा इंसान के सम्मान से बड़ी कोई चीज नहीं है। यदि यह हो तो करोड़ों मतभेदों के बाद भी इन्सानों का सहजीवन संभव है। सलीम खान को बहुत बधाई कि वे विज्ञान की दुनिया में कदम रख रहे हैं।

Dr. Mahesh Sinha ने कहा…

आप दोनों को बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएं

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

हमको मालूम है जनात की हकीकत लेकिन...

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

चलिए आपने बताया मान लेते है .यह सुखद खबर है ....

अजय कुमार ने कहा…

जाकिर भाई आपका आभार , नेक काम किया आपने

Suman ने कहा…

nice

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

सच में ?

बहुत अच्छी बात है ! सुबह का भूला शाम को घर आ जाए तो उसे भूला नहीं कहते !

रंजन ने कहा…

अगर ये सच है तो आप बहुत अच्छे कॉंसलर हो.. बधाई..

सलिम भाई को शुभकामनाऐं..

संजय बेंगाणी ने कहा…

आपने एक बार कहा था बिना हाय-होय किये चुपचाप अपना काम करते रहो, तब सलिम खान को समझ नहीं आया था. लगता है अब आ गया है.

वे विज्ञान पर लिखे या इस्लाम पर कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि सलीम खान से या इस्लाम से कोई परेशानी नहीं थी. हमें दोयम दर्जे का बताये जाने से परेशानी थी. वे भी चुप तो हमें क्या पागल कुत्ते ने काटा है?

वैसे आपने वे हालात नहीं बताए जो एक भले आदमी को.....

नई शुरूआत की बधाई. भगवान सलीम खान को लम्बी स्वस्थ सुखी जिन्दगी दे.

ab inconvenienti ने कहा…

सलीम खान लिखे इस्लाम पर या मुस्लिमों समाज पर या विज्ञान और अर्थशास्त्र पर किसी को क्यों परेशानी क्यों होगी? बेवजह तुलना करना, बिलो द बेल्ट प्रहार करना, एक मज़हब को दूसरे से बेहतर बताना, भड़काऊ पोस्ट ठेलना, फालतू में विवाद पैदा करना..... इन सबसे लोग नाराज़ होते हैं.

सच तो यह है की हिन्दू ब्लॉगर भी इस्लाम के बारे में ज्यादा जानना चाहते हैं, बस बताने का तरीका मित्रतापूर्ण हो, वैज्ञानिकता, रेश्नालिती और तथ्यों का ध्यान रखा जाए और भड़काऊ लेख या तुलना से दूर रहा जाए, विचार थोपने की कोशिश न की जाए.

संगीता पुरी ने कहा…

सलीम जी को शुभकामनाएं !!

ali ने कहा…

दिनेश राय द्विवेदी के अभिमत से सहमत !

राजीव तनेजा ने कहा…

सलीम खान जी बहुत बढिया लिखते हैँ...इसमें कोई शक नहीं... उनकी लेखन प्रतिभा का मैँ शुरू से कायल रहा हूँ बेशक उनके द्वारा की जाने वाली इस्लाम और हिन्दुत्व की तुलना से मैँ उनके विचारों से इतेफाक नहीं रखता था...फिर भी मैँ उन्हें हर बार पढता था ...इस नई शुरूआत के लिए उन्हें बहुत-बहुत बधाई

AlbelaKhatri.com ने कहा…

aaj ke din ki sabse badi khush khabar hai ye,,,,,,,,,,,

main is samaachaar par abhibhoot hoon

aur bhai saleem khan ko mubaaraqbad deta hoon..

wish you all the very best !

dhiru singh {धीरू सिंह} ने कहा…

बधाई आपको सलीम को सही राह पर लाने के लिये .

DIVINEPREACHINGS ने कहा…

जाकिर भाई,

आप खुदा के फरिश्ते हैं जो एक भटके उए आदमी को सही रास्ते पर लाने का कार्य कर रहे हैं । इस्लाम बहुत पाक धर्म है और किसी को यह नहीं सिखाता कि आप दूसरों के धर्म पर कीचड उछालें । आपको दूसरों के धर्म चाहे जैसे भी लगते हों आपको कोई हक नहीं है कि आप उसे तोड-मरोड कर इस्लाम से संबंध स्थापित करने का प्रयास करें । राजनैतिक स्तर पर हम जो चाहे विचार रखते हों...वहाँ हमारी स्वतंत्रता है मगर दूसरों के विश्वास पर छींटा कशी अच्छी बात नहीं । पाकिस्तान से कितने ही भेडिए तरह-तरह के भेष में आकर हमारे युवकों को गुमराह करते रहते हैं । वे धन का सहारा भी लेते हैं और क़ौम का पाठ भी पढाते हैं ...देश में नफरत पैदा करते हैं और आतंकवाद फैलाते हैं । हमें उन ताकतों से सावधान रहना चाहिए और अपने बच्चों को भाईयों को उनसे बचाना चाहिए । हम इस मुल्क के राष्ट्र भक्त बाशिन्दे हैं हिन्दू-मुस्लिम सब यहाँ मिल कर रहने के लिए हैं...थोडी बहुत चख चख किस परिवार में नहीं होती । सलीम के भविष्य के लिए शुभ कामनाएँ ।

महफूज़ अली ने कहा…

जाकिर भाई आपका आभार , नेक काम किया आपने...

JHAROKHA ने कहा…

अच्छा लगा पढ़ कर----

बी एस पाबला ने कहा…

निश्चित तौर पर हिन्दी ब्लोगजगत में किसी की भी किसी से व्यक्तिगत दुश्मनी बिल्कुल नहीं है

आपको बधाई, सलीम को शुभकमनाएँ

बी एस पाबला

प्रकाश गोविन्द ने कहा…

जो हुआ अच्छा हुआ...जो हो रहा है वो भी अच्छा है...और जो आगे होगा वो भी अच्छा ही होगा

सलीम जी पर सुलगे हुए तो हम भी बैठे थे लेकिन जाकिर भाई आप कह रहे हैं तो अविश्वास की कोई बात ही नहीं !
सलीम जी के पुनरुद्धार पर हार्दिक अभिनन्दन है !

अर्कजेश ने कहा…

यदि यह परिवर्तन स्‍थाई हुआ तो यह एक बेहतरीन उपलब्धि होगी । खुद सलीम भाई और आपके लिए भी ।

शुभकामनाऍ ।

sahespuriya ने कहा…

JO AAG MAHFOOZ NE LAGAI THI,USKO AAP NE DABA KAR ACHCHA KAAM KIYA HAI,WARNA LOGO KO TO AAG LAGANE MAIN MAZA AATAA HAI

Ghost Buster ने कहा…

अच्छा?

Rakesh Singh - राकेश सिंह ने कहा…

तस्लीम जी यदि सलीम खान परिवर्तित हो कर सही रास्ते पे चलना आरम्भ कर दे तो ये वाकई मैं खुसी की बात है. लेकिन ऐसा होगा ... ये मुझे अब तक विश्वास नहीं हो रहा है ....

चलिए आप पे भरोसा है ... मान लेते हैं .... और देखते हैं सलीम खान कब टाक आपके भरोसे को सही सलामत रखता है ...

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

शुभकामनायें । विज्ञान लेखन शुभ हो !

RAJ SINH ने कहा…

:) . ? > ! .

सुलभ सतरंगी ने कहा…

अपने ब्लॉगजगत के हालिया अनुभव पर इतना जरुर कह सकता हूँ की कुछ ब्लोगर अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता अच्छी तरह समझते हैं. वे सदैव विकास, स्वस्थ चर्चा और शान्ति की बात करते हैं, और श्रीमान जाकिर अली इनमे से एक हैं.

किसी के द्वारा किसी का जाने अनजाने ब्लॉग पर चरित्र चित्रण करना यह भी अपराध की श्रेणी में ही आएगा. मैं किसी से सहानुभूति की बात न करते हुए, सलीम खान और इस प्रकरण से नुक्सान हुए बंधुओं के लिए अपनी शुभकामनाएं भेज रहा हूँ.

आशा है आस्था का ख्याल रखते हुए निरंतर वैज्ञानिक चिंतन कर हम सभी भारतवासी स्वर्णिम सफलता को प्राप्त करें. साइंस ब्लोगर्स एशोसिअशन को साधुवाद!

- सुलभ

मनोज कुमार ने कहा…

आप दोनों को बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएं

Santosh Sigh ने कहा…

Aasha hai Salim ji Jakir Bhai ke Vishvaas ko banaye rakhenge.

डा0 दिनेश चन्द्र अवस्थी ने कहा…

Naya prayas safal ho, hamari yahi kaamna hai.

Meenu Khare ने कहा…

यदि ऐसा हो पाया तो यह ब्लॉगजगत में सदभाव के लिए आपका बहुत बड़ा योगदान होगा ज़ाकिर. ब्लॉग जगत के सबसे बड़े दुर्भाव अक्सर इसी ब्लॉग से उपजते थे और व्यर्थ का माहौल बिगड़ता था. सलीम प्रतिभाशाली हैं मुझे पूरा विश्वास है कि इस परिवर्तन से उनके अच्छे लेखन का लोहा ब्लॉग जगत ज़रूर मानेगा. शुभकामनाएँ.

Dr. shyam gupta ने कहा…

परिस्थितियों से बदलजाय उसे पता नहीं क्या कहते हैं
बद्ल दे परिस्थितियों को उसी को आदमी कहते हैं ।

ई-गुरु राजीव ने कहा…

भाई आपने वह कर दिखाया जो हम करना चाहते थे.
हमने सोचा था कि कभी हम सलीम से मिलेंगे और उसकी नफरत का कारण पूछेंगे और यथा संभव तरीके से दूर करेंगे.
मैंने सोचा था कि कभी सहारा-गंज बुला कर सलीम की क्लास लूं.
मैं उसके साथ लखनवी तहजीब (हिन्दू-मुस्लिम एकता) को लेकर एक ब्लॉग बनाना चाहता था, पर व्यस्तता के कारण समय नहीं निकाल सका.
वह भी भारतीय समाज का अंग है यह उसे समझना चाहिए. अरब देश का झंडा बुलंद करके क्या पायेगा. पूरे विश्व में पाकिस्तानी मुसलमान आतंकवादी माने जाते हैं, सबसे ज्यादा सुखी भारतीय मुस्लिम ही हैं.
अतः उन्हें इस राष्ट्र के प्रति कृतज्ञ होना ही चाहिए.
वन्दे मातरम् बोलने वाले के हिसाब से भी भगवान् एक ही होते हैं, दो नहीं हो जाते. उनकी आपत्तियां कट्टरवादियों की ही देन हैं, जिसे हिन्दू अपने प्यार और सहिष्णुता से ही जीत सकता है.
सलीम खान की वापसी का तह-ए-दिल से स्वागत करता हूँ.
अल्लाह उन्हें सदबुधि दे और सही राह पर चलने की प्रेरणा भी दे.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहुत अच्छा लगा जान कर ....... और जाकिर भाई आप का भी शुक्रिया ......... ब्लॉगेर्स की दुनिया जितनी स्वाक्ष रहे उतना ही अच्छा है .........

महाशक्ति ने कहा…

इससे अच्‍छी और क्‍या बात हो सकती है ? हम आपके इस प्रयास की भूरि भूरि प्रशंशा करते है।

वैसे उन्‍होने 6 माह बाद देख लेने की धमकी दी थी किन्‍तु अगर हृदय परिवर्तन हुआ है तो हम प्रार्थना करेगे कि उनके इस नेक काम में अल्‍लाह/ईश्वर मदद करें।

मै संजय भैया की बात का सर्मथन करता हूँ कि मुझे भी किसी अल्‍लाह विरोधी पागल कुत्ते ने नही काटा है कि मै भी ऐसा कुछ लिखूँ, मेरी अपनी ब्‍लागनी‍ति है जिसमें धर्मिक विषयो पर प्रथम न लिखने की बात कही है।

Arvind Mishra ने कहा…

महराज मुझसे तो पूंछ लिया होता -मैं सलीम के प्रति पूरे सम्मान और विनम्रता से कहूँगा की वे फिलहाल परवीक्षा में रहेगें !

स्वच्छ संदेश: हिन्दोस्तान की आवाज़ ने कहा…

ज़ाकिर भाई, आपका धन्यवाद और शुभकामनायें !

मैं उन सभी ब्लोगर्स का हार्दिक स्वागत व अभिनन्दन करता हूँ, जिन्होंने अपना कीमती वक़्त निकाल कर यहाँ अपने विचार प्रस्तुत किये.

सलीम खान

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

... प्रयास के सफ़ल होने की आशा है !!!!!!

KAVITA RAWAT ने कहा…

Sabki sadbhawana bani rahe, bhatke yadi sahi raah par aa jayen to isse achhi or kya baat ho sakti hai. sahi raah dikhane walon ki hi aaj sahi mayanon mein darkarar hai......

 

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