Tuesday, 9 February 2010

वर्ष 2009 के सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर्स हेतु संवाद सम्मान:- 20 श्रेणियाँ, 250 नामांकन। नाम फाइनल करने में 'नाकों चने चबाना', 'पहाड़ चीर कर नहर बनाना', 'लोहे के चने चबाना' जैसे सारे मुहावरे सार्थक हो गये।

लो भई, जिसका इंतज़ार था, वो घड़ी आ गयी, आ गयी।
जी हाँ, जैसे कि पूर्व में घोषित किया गया था कि 'सार्थक ब्लॉगिंग' को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'संवाद डॉट कॉम' द्वारा प्रस्तावित वर्ष 2009 के लिए 20 विभिन्न श्रेणियों हेतु प्रस्तावित 'संवाद सम्मान' की सम्पूर्ण प्रक्रियाएँ पूरी कर ली गयी हैं।

जैसा कि पूर्व में बताया गया था कि सबसे पहले हिन्दी ब्लॉग जगत में सक्रिय 25 नवीन एवं वरिष्ठ ब्लॉगर्स से सभी श्रेणियों हेतु नाम मांगे गये थे। इस हेतु एक छोटी सी शर्त भी लगाई गयी थी कि कोई भी व्यक्ति इस सम्मान हेतु अपना नामांकन नहीं करेगा। शायद इसी का खामियाजा हमें भुगतना पड़ा और 25 में से सिर्फ 08 लोगों ने उक्त सम्मान हेतु अपने नामांकन भेजे। बाकी लोगों ने अलग-अलग कारणों से अपनी-अपनी अस्मर्थता बताते हुए कन्नी काट ली। इसलिए मैं समझता हूँ कि जिन लोगों ने इस हेतु अपना कीमती समय निकाल कर सहयोग प्रदान किया, उनके नाम घोषित किये जाने चाहिए। वे सम्माननीय ब्लॉगर हैं सर्वश्री/सुश्री हिमांशु पाण्डेय, नीरज गोस्वामी, मसिजीवी, बी0एस0 पाबला, मीनू खरे, रचना सिंह, रंजना भाटिया और सीमा गुप्ता। इन सभी ब्लॉगर्स के लिए संवाद समूह अपना आभार व्यक्त करता है।

व्यक्तिगत रूप से माँगी गयी प्रविष्टियों की इस विपन्नता को देखते हुए और ब्लॉगर साथियों  के सुझाव के फलस्वरूप ऑन लाइन नामांकन का विकल्प भी आजमाया गया। ऑनलाइन नामांकन में ब्लॉगर्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और कुल 20 श्रेणियों हेतु 251 नामांकन प्राप्त हुए। उपरोक्त दोनों प्रक्रियाओं से प्राप्त नामों पर गम्भीरतापूर्वक विचार करते हुए सभी श्रेणियों के नाम फाइनल कर लिये गये हैं। इन सभी घोषणाओं से पहले कुछ बातें स्पष्ट कर देना आवश्यक है।

1. सभी श्रेणियों हेतु एक-एक व्यक्ति को सम्मान स्वरूप 1001 रूपये की सम्मान राशि, सम्मान पत्र, ई प्रमाण पत्र का प्राविधान किया गया है।  इसके अतिरिक्त प्रत्येक श्रेणी में एक अन्य व्यक्ति को नामित सम्मान भी प्रदान किया जाएगा। नामित सम्मान हेतु ई-प्रमाण पत्र का प्राविधान किया गया है।

2. संवाद सम्मानों हेतु सभी श्रेणियों हेतु नामों का निर्धारण करते समय ब्लॉगर्स के समग्र योगदान को द़ष्टिगत रखते हुए फैसले लिए गये हैं। इन फैसलों में किसी-किसी श्रेणी में व्यक्ति विशेष के स्थान पर सामुहिक ब्लॉग को भी चुना गया है। चूंकि सामुहिक ब्लॉग किसी एक व्यक्ति का प्रयास नहीं होता है, इसलिए इस हेतु यह निर्णय लिया गया है कि किसी भी श्रेणी में सामुहिक ब्लॉग का नाम आने पर उस श्रेणी में सम्मान राशि नहीं प्रदान की जाएगी, सिर्फ ई-प्रमाण पत्र और सम्मान पत्र ही प्रदान किया जाएगा।

3. सामुहिक ब्लॉग को सम्मानित करने पर सम्मान पत्र लेने का अधिकारी कौन होगा, यह उस ब्लॉग के लोगों को मिलजुल कर तय करना होगा और उस ब्लॉग की मूल आई0डी0 के द्वारा इसकी सूचना मुझे व्यक्तिगत रूप से मेल आई डी zakirlko@gmail.com पर देना होगा, जिससे सम्मान समारोह में उस व्यक्ति को आमंत्रित किया जा सके।

4. सम्मानित ब्लॉगर्स को उपरोक्त सम्मानों से नवाजने के लिए लखनऊ में 'लखनऊ ब्लॉगर्स असोसिएशन' के सहयोग से एक 'ब्लॉगर्स सम्मेलन' का आयोजन किया जाना प्रस्तावित है। उस सम्मेलन में सभी सम्मानित ब्लागर्स को आमंत्रित किया जाएगा और आदरपूर्वक सम्मान राशि, सम्मान पत्र, श्रीफल एवं शॉल भेंट किया जाएगा।

5.सम्मेलन के आयोजन की तिथि की सूचना सभी सभी सम्मानित ब्लॉगर्स को अलग से दी जाएगी। इस सम्बंध में सभी लोगों से आग्रह है कि वे अनावश्यक रूप से मेल से पूछताछ नहीं करेंगे।

6. 'संवाद सम्मान' सकारात्मक हिन्दी ब्लॉगिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इस हेतु जिन नामों का निर्धारण किया गया है, वह संवाद समूह का एक सामुहिक प्रयास है। इस सम्बंध में सभी निर्णय सर्वमान्य होंगे। किसी भी श्रेणी हेतु किसी भी नाम को चुनौती नहीं दी जा सकेगी।

7. 'संवाद सम्मान' के विजेता ब्लॉगर यदि इस सम्बंध में कोई जानकारी चाहें तो मुझे व्यक्तिगत रूप से मेरी मेल आई डी zakirlko@gmail.com पर मेल भेजकर पूछ सकते हैं। ऐसी सभी मेल में विषय के रूप में 'संवाद सम्मान' अवश्य अंकित किया जाना चाहिए।

तो साथियो, बस थोड़ा सा धैर्य और धरें और अगली पोस्ट का इंतजा़र करें। जल्‍द ही आपको पता चल जाएगा कि वर्ष 2009 के लिए 20 श्रेणियों के 'संवाद सम्मान' विजेता कौन-कौन हैं।

Sunday, 31 January 2010

लड़कियों और मछलियों में कोई समानता होती है क्या?

नहीं भाई, मेरी दिमागी हालत बिलकुल ठीक है। और हाँ, नारीवादियों से पंगा लेने का मेरा कोई इरादा भी नहीं है। लेकिन आप सोच रहे होंगे कि फिर इस तरह ऊल-जलूल सवाल का क्या मतलब है? भला मछलियों और लड़कियों में क्या कोई समानता हो सकती है? तो चलिए बता देते हैं कि इस सवाल की वजह क्या है?

दरअसल उत्तर प्रदेश मत्स्य विभाग ने 29 से 31 जनवरी को लखनऊ में 'मत्स्य मेला' का आयोजन किया था। मेले की संचालन में समति में डा0 अरविंद मिश्र के जुड़े होने के कारण मुझे भी वहाँ जाने का सौभाग्य मिला। वहाँ की रंग-बिरंगी मछलियों को देखते हुए ही मेरे दिमाग में सहसा यह विचार कौंधा। और तभी बहुत पहले लिखी हुई मेरी एक कविता की पंक्तियाँ दिमाग में गूँज उठीं-
जाने कैसे हंसती हैं लड़कियाँ?
पिता की झिड़कियों
माँ की बंदिशों,
भाई जैसे पहरेदार
समाज के लोकाचार,
परम्पराओं, रस्मों के कांटों
पग-पग घूमते शिकारी कुत्तों से
कैसे बचती हैं लड़कियाँ?
जाने कैसे हंसती हैं लड़कियाँ?

मछलियाँ देखने में प्यारी लगती हैं, बेहद चंचल होती हैं, लेकिन इसके बावजूद एक्वेरियम में कैद करके रखी जाती हैं और उन्हें खुद नहीं पता चलता कि कब भूखे मनुष्य की भूख का शिकार बन जाती हैं। क्या लड़कियों की स्थिति भी समाज में वैसी ही नहीं है? 

भले ही हम अपनी आजादी का 60वाँ गणतंत्र मना चुके हों, पर आज भी लड़कियां समाज के एक पारदर्शी कवच में ही कैद नजर आती हैं। बावजूद उसके वे हंसती हैं, खिलखिलाती हैं, खुशी से इधर-उधर इतराती फिरती हैं। और इन सबके बीच मछलियों की ही तरह पता नहीं कब भूखे भेडियों की शिकार बन जाती हैं।

मैं सोच रहा था कि 'मत्स्य मेला' पर कुछ लिखूँगा पर पता नहीं कब मेरे 'शाकाहारी दिमाग' में यह विचार अतिक्रमण कर गया और मैं न चाहते हुए भी यह सब लिख गया। वैसे मैंने कुछ गलत लिखा क्या?

Thursday, 28 January 2010

लखनऊ की पहली औपचारिक चिट्ठाकार भिड़ण्त में आप सादर आमंत्रित हैं।


न-न, कन्फ्यूजियाइए नहीं। ई महफूज़ भाई इस्टाइल भिड़ण्त नहीं, सिम्पल ब्लॉगर मीट है, जो खनऊ ब्लॉगर्स एसोसिएशन और साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन द्वारा आयोजित की जा रही है, जहाँ पर लखनवी चिट्ठाकार आई मीन ब्लॉगर आपस में भिड़ण्त यानी मुक्कालात सॉरी मुलाकात करेंगे।

अब आप ये भी पूछेंगे ही कि इस भिड़ण्त का उद्देश्य क्या है भाई? आखिर कौन सी खुशी में ई प्रोग्राम रखा जा रहा है? हाँ, तो ई जानना आपका नैतिक और जन्मसिद्ध अधिकार है, इस नाते हम भी आपको बताने में पीछे नहीं हटेंगे।

दरअसल मुआमला ये है कि लखनऊ में इन दिनों मोती महल लॉन में मत्स्य मेला-2010 का आयोजन किया जा रहा है। इस मेले की आयोजन कमेटी में डा0 अरविंद मिश्र जी भी शामिल हैं। तो वे उस आयोजन को सफल बनाने के लिए 27 तारीख से लखनऊ में पधारे हुए हैं। तो उनके स्वागत में और लखनऊ के ब्लॉगरॉन को एक जगह एकत्रित करने के लिए ये बैठका जुटाया जा रहा है।

अब आते हैं मुद्दे की बात, यानी कि ये बैठका कब हो रहा है और कहां हो रहा है। तो आप इसे नोट कर लीजिए कि ये बैठका गोखले मार्ग स्थित एन0बी0आर0आई0 के गेस्ट हाउस में प्रस्तावित है और उसकी तारीख है 30 जनवरी। समय रखा गया है, शाम के 06 बजे का। हाँ, तो आपको कोई दिक्कत तो नहीं होगी न? इसीलिए हम आपका इंतजार करेंगे।

बैठका में पूर्व में अनुमति देने वालों में जीशान भाई, गिरिजेश भाई, महफूज भाई, रवीन्द्र भाई अरे वही परिकल्पना वाले और यह नाचीज शामिल हैं। लगे हाथ आपको बताते चलें कि अपने सलीम भाई भी वहाँ आ रहे हैं। न-न, आप उसकी चिंता न करें, वहाँ किसी प्रकार की भिड़ण्त नहीं होगी, इसका जिम्मा मेरा है। तो अगर आप लखनऊ में हैं, ब्लॉग लिखने के कीड़े पाल रखे हैं और दूसरों के कीड़ों से अपनों की तुलना करना चाहते हैं, तो आप इस भिड़ण्त सॉरी चिट्ठाकार बैठका में सादर आमंत्रित हैं। और हाँ, अगर आप आ रहे हों, तो मेरे फोन नं0 9935923334 पर पूर्व सूचना अवश्य दे दें। अरे भई, आपके स्वागत का इंतजाम भी तो करना रहेगा न। हाँ, तो फिर देर किस बात की? मैं आपके फोन का इंतजार कर रहा हूँ।
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साथियो, खेद के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि अपरिहार्य कारणवश यह बैठक स्थगित करनी पड़ी है। इस निर्णय के लिए हमें खेद है। आशा है जल्दी ही यह बैठक बुलाई जाएगी, तब लखनवी ब्लॉगर्स की सार्थक बैठक का आनन्द लिया जाएगा।

Wednesday, 27 January 2010

ब्लॉगिंग को हल्के में न लें, अगले महीने एक और धमाके के लिए रहें तैयार....

कुछ लोगों के लिए ब्लॉगिंग मौज-मस्ती का जरिया है, कुछ लोगों के लिए ब्लॉगिंग इन्टैरक्शन का माध्यम है, किसी लिए ब्लॉगिंग वाह-वाही पाने का मौका है, किसी के लिए ब्लॉगिंग घर फूँक तमाशा देखने के समान है, किसी के लिए ब्लॉगिंग साहित्य-सेवा का माध्यम है, किसी के लिए ब्लॉगिंग अपनी दुकान चलाने का अवसर है, किसी के लिए ब्लॉगिंग समाज सेवा का आधार है.... अब क्या-क्या कहें? आपके लिए ब्लॉगिंग जो मायने रखती हो, आप वो सारी बातें इस डैश-डैश के बाद जोड़ने के लिए स्वतंत्र हैं, हम इसका कतई बुरा नहीं मानेंगे।

हाँ, तो बात ब्लॉगिंग की हो रही है। आप पूछेंगे कि हमारे लिए ब्लॉगिंग क्या है? अगर सचमुच कहूं, तो हमारे लिए ब्लॉगिंग अपने विचारों को दूसरों तक पहुंचाने का एक आसान माध्यम है। और यही कारण है कि मैं अपने पर्सनल ब्लॉग से ज्यादा 'तस्लीम' और 'साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन' को समय दे रहा हूँ। और यह देखकर प्रसन्नता होती है कि आप सबके सहयोग से चलने वाले इस वैज्ञानिक चेतना के आंदोलन को बल मिल रहा है, लोग लगातार उससे जुड़ रहे हैं।

पिछले एक-दो सालों में वैज्ञानिक चेतना को लेकर ब्लॉग जगत में जो हलचल रही है, उसका लेखा-जोखा आप सबने 'साइंस रिपोर्टर' मैग्जीन के जनवरी अंक में पढ़ा ही होगा। डा0 अरविंद मिश्र की इस रिपोर्ट को पढ़ने के बाद एक-दो लोगों ने कहा था कि यह रिपोर्ट हिन्दी में छपती, तो कुछ और बात होती।

साथियो, आप सबको बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है हिन्दी में प्रकाशित होने वाली विज्ञान केन्द्रित चर्चित पत्रिका "विज्ञान प्रगति" के फरवरी अंक में विज्ञान ब्लॉगिंग पर डा0 अरविंद मिश्र एक विस्त़ृत आलेख प्रकाशित हो रहा है। यह आलेख ब्लॉग की उपयोगिता और महत्ता को रेखांकित करने का एक और प्रयास है। आप सब इस लेख को अवश्य पढिएगा और अपनी प्रतिक्रिया से हमें जरूर अवगत कराइएगा।

Friday, 22 January 2010

सचमुच ब्लॉगवाणी का कोई मुकाबला नहीं है।


हिन्दी ब्लॉगों को प्रोत्साहन देने के लिए ब्लॉगवाणी जो काम कर रहा है, सचमुच वह अतुलनीय है। हालाँकि 'ब्लॉगवाणी' के अलावा अन्य एग्रीगेटर भी यह काम कर रहे हैं, पर 'ब्लॉगवाणी' जैसी सेवा भावना अन्यत्र दुर्लभ है। खासकर पिछले दिनों 'ब्लॉगवाणी' पर 'पंसद' सम्बंधी हुए विवाद के बाद उसका जो नया रूप आया है, उसने सबका मन मोह लिया है। 'ब्लॉगवाणी' की जिन सुविधाओं ने लोगों का मन मोहा है, वे निम्नानुसार हैं-

1- साइट अब पहले की तुलना में जल्दी खुल जाती है।
2- 'आज की हलचल' सतम्भ के अन्तर्गत 'हॉट' श्रेणी काफी दिलचस्प है।
3- साइट में कैलेण्डर जोड़े जाने से किसी भी दिन की पोस्ट देखना काफी आसान हो गया है।
4- पसंद के लिए लॉगिन होने की अनिवार्यता से पारदर्शिता बढ़ी है।
5- 'कहीं से कुछ ब्लॉग' कॉलम एक नया प्रयोग है, जो वाकई काबिले-तारीफ है।
6- 'कन्टेन्ट' श्रेणी में अन्य भाषाओं को जोड़ना भी एक सुंदर प्रयास है, इससे हिन्दी ब्लॉगों की पहुंच अन्य भाषी लोगों के बीच भी बनेगी।


7- अंत में सबसे प्रमख कारण, जिसके कारण यह पोस्ट लिखने का मन हुआ, वह है 'हॉट' श्रेणी में एक साथ 'ब्लॉगवाणी' द्वारा भेजे गये पाठकों की संख्या, प्राप्त टिप्पणियों और पसंद को एक साथ दिखाना।

इस बदलाव को देखकर मैं व्यक्गित रूप से मैथिली जी और सिरिल जी को बधाई देना चाहूँगा। साथ ही साथ यह भी कहना चाहूँगा कि आप लोगों के द्वारा हिन्दी ब्लॉग के उन्नयन के लिए जो प्रयास किये जा रहे हैं, वे सचमुच काबिले-दाद हैं। इनकी जितनी सराहना की जाए, कम है।

लेकिन इसके साथ ही मैं 'ब्लॉगवाणी' में कुछ सुधार की भी सलाह देना चाहूंगा, जैसे कि मुझे लग रहा है कि 'ब्लॉगवाणी' में पहले की तुलना में नये ब्लॉग जोड़ना काफी मुश्किल हो गया है। इसके साथ ही साथ मुख्य पृष्ष्ठ पर, जहाँ सारे ब्लॉग दिखाए जाते हैं, उस पेज के समाप्त होने पर यदि पूर्व की तरह अन्य ब्लॉग को देखने के लिए पहले की तरह पेज सिस्टम लगा दिया जाए, तो उससे पाठकों को ज्यादा सुविधा होगी।

आशा है मैथिली और सिरिल जी इन सुझावों पर भी ध्यान देंगे, जिससे हमारी 'ब्लॉगवाणी' और बेहतर हो सके और पाठकों को ज्यादा सुविधा हो सके।

Wednesday, 20 January 2010

वो फरिश्ते की तरह ज़िन्दगी में आया है......


ज़िन्दगी को 'जंग' भी कहा गया है और 'जुआ' भी, लेकिन कभी-कभी ऐसे हालात आ जाते हैं कि सब कुछ आपके खिलाफ़ होता चला जाता है। आप लाख सही हों, लाख प्रयत्न करें, पर स्थितियाँ विपरीत होती चली जाती हैं। ऐसे में आप अपने आपको एक भयानक तूफान में खड़ा पाते हैं। आप लाख कोशिश करें, पर उससे निकल नहीं पाते, आप कितने भी हाथ-पैर मार लें, लेकिन कुछ भी अच्छा नहीं होता।

लेकिन फिर अचानक कोई फरिश्ता सा आपकी ज़िन्दगी में आता है और अपकी ज़िन्दगी बदलती चली जाती है। आपकी ज़िन्दगी में भी ज़रूर ऐसा हुआ होगा?

हाँ, मेरी ज़िन्दगी में ज़रूर ऐसा हुआ है। आज से तीन साल पहले मेरी भी ज़िन्दगी में एक ऐसा तूफान आया था, जिसने सब कुछ हिला कर रख दिया। आर्थिक, सामाजिक ही नहीं पारिवारिक भूचाल में मैं ऐसा घिरा कि लगा अब कुछ भी हाथ नहीं आएगा। सब कुछ मुट्ठी में कैद रेत की मानिन्द बिखरता चला जाएगा।

लेकिन तभी एक चमत्कार जैसा हुआ और मेरी ज़िन्दगी में मेरा दूसरा बेटा आया। उसके आते ही जैसे हालात खुद-बखुद बदलते चले गये। तमाम प्रतिकूल परिस्थितयों में, जबकि मेरे हाथ में लगभग एक लाख रूपये थे, मैंने मकान बनवाने की शुरूआत कर दी। मैंने सोचा था कि जितना काम होगा, हो जाएगा, बाकी बाद में देखा जाएगा। लेकिन पता नहीं क्या हुआ, कैसे हुआ और मकान बनता चला गया। बिना किसी लोन, बिना किसी उधारी के बावजूद मेरा टू-रूम सेट बनकर तैयार हो गया। मेरे लिए यह वास्तव में एक चमत्कार जैसा था। क्योंकि जब हिसाब-किताब लगाया गया, तो पता चला कि लगभग साढ़े तीन लाख रूपये खर्च हो चुके थे। हम पिछले डेढ़ साल से अपने नए मकान में उस फरिश्ते के साथ ही रह रहे हैं।

अरे, मैंने उस फरिश्ते का नाम तो आपको बताया ही नहीं। उसका नाम है रामिश। रामिश, यानी मेरा छोटा बेटा। रामिश, अरबी/फारसी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है खुशी। रामिश, जब से मेरी ज़िन्दगी में आया है, खुशियां ही खुशियां बिखेर रहा है। इसीलिए उसका नाम रामिश अर्थात खुशी रखा गया है। आज उसका जन्मदिन है। आज वह पूरे दो साल का हो गया है।

Sunday, 17 January 2010

शुक्रिया ब्लॉगर्स। जल्दी ही घोषित किए जाएंगे संवाद सम्मान।

सकारात्मक ब्लॉगिंग को बढ़ावा देने के लिए संवाद डॉट कॉम द्वारा प्रस्तावित 'संवाद सम्मान' के लिए आयोजित ऑन लाइन नॉमिनेशन में आप सबने जिस उत्साह से  भाग लिया है, उसके लिए हम आप सबके हृदय से आभारी हैं।

नॉमिनेशन से मिले नामों और ब्लॉगर्स से मांगे गये नामों पर विचार किया जा रहा है। हमारा प्रयास रहेगा कि इन सभी नामों पर निष्पक्षतापूर्वक विचार हो और जो व्यक्ति गुणवत्ता की दृष्टि से योग्य हो तथा ब्लॉग जगत को समृद्ध करने में तन-मन से योगदान दे रहा हो, उसका सम्मान अवश्य हो।

इस सम्पूर्ण प्रक्रिया में हमारी कोशिश रहेगी कि पारदर्शिता बनी रहे और किसी प्रकार का विवाद न होने पाए। आशा है सकारात्मक ब्लॉगिंग को बढ़ावा देने के इस प्रयास में आप सब हमारे साथ रहेंगे।